सुभाषिनी जी नमस्कार आपका लेखन अंतर्मन की गहराइयों को प्रभावित करता हुआ दिव्य मानसरोवर का आविर्भाव करता है .आपका लेखन बहुत प्यारा है .आपके लिए हार्दिक शुभ कामना .आपको अपना एक मुक्तक सुनाता हूँ संभव है आपको प्रिय लगे -पञ्च स्वर में प्रलापों में निशीथों में पुकारा है , मेरा मन मेरे वश में है कहाँ ये तो तुम्हारा है , तुमसे अभिभूत अंतर्मन अमित तेरा है अनुगामी , तुम्हारा ही तो सब कुछ है न कुछ अब तो हमारा है . - गीत लेखक -अमित श्रीवास्तव अधिवक्ता ,सदस्य हिंदी विधि प्रतिष्ठान सिविल कोर्ट सीतापुर उत्तर प्रदेश भारत
5 Comments:
all the poems here are very well written, original, sublime. thanks Swar.
Bohat Khoob !!!
सुभाषिनी जी नमस्कार आपका लेखन अंतर्मन की गहराइयों को प्रभावित करता हुआ दिव्य मानसरोवर का आविर्भाव करता है .आपका लेखन बहुत प्यारा है .आपके लिए हार्दिक शुभ कामना .आपको अपना एक मुक्तक सुनाता हूँ संभव है आपको प्रिय लगे -पञ्च स्वर में प्रलापों में निशीथों में पुकारा है , मेरा मन मेरे वश में है कहाँ ये तो तुम्हारा है , तुमसे अभिभूत अंतर्मन अमित तेरा है अनुगामी , तुम्हारा ही तो सब कुछ है न कुछ अब तो हमारा है . - गीत लेखक -अमित श्रीवास्तव अधिवक्ता ,सदस्य हिंदी विधि प्रतिष्ठान सिविल कोर्ट सीतापुर उत्तर प्रदेश भारत
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Wah Wah, like father, like daughter Subhashiniji
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